Chapter 1
“चलोगी मेरे साथ!”
“कहाँ?”
“श्रवणबेलगोला”
“तुम्हे याद है न तुमने एक date पर ले जाने का वादा किया है !”
“अरे! तो ये एक धार्मिक डेट भी तो हो सकती है |पर… ये date थोड़ी कहलाएगी!”
“क्यों भला?”
“क्यूंकि तुम और मैं तो शादी शुदा हैं |“
“किसने कहा date सिर्फ unmarried लोगो के लिए होती है?!”
“तो फिर किसने कहा की date सिर्फ restaurant में dinner करने से होती है!”
“ठीक है फिर चलो बेलगोला ! पर.. वहां जाकर करेंगे क्या?”
“वही जो हर एक couple करता है|”
“और वो क्या है???”
“धत्त पगली ! वंदना और पूजा ! तुम भी ना ! कुछ नहीं समझती|”
“हाँ मैं तो हूँ ही बुद्धू… इसलिए ही तो तुम्हारी बातों में आजाती हूँ …तो चलो फिर चलते हैं.. पर ये तो बताओ की बाहुबली भगवान ही क्यों?”
“क्यूंकि वो मेरे पसंदीदा हैं| “
“भगवानों में भी भेद होने लगा अब ! पंचम काल है|”
“तुम भी ना !! मुझे न उनसे अचल बनने की प्रेरणा मिलती है|”
“Oh! I see..
“तुम भी ना कितनी dramatic हो.. ”
“हां जी और कुछ?”
“नहीं ! बाकि बाद में बताऊंगा |”
———–
Chapter 2
1 साल पहले
“मम्मी! ये कैसी लड़की का biodata भेज दिया आपने?”
यश के स्वर में झुंझलाहट थी, और हाथ में पकड़ा हुआ biodata जैसे उसे चुभ रहा था। माँ ने चश्मा ठीक करते हुए उसकी तरफ देखा, जैसे सवाल पहले ही सुन चुकी हों।
“इतनी अच्छी तो है। पढ़ी-लिखी है, सुन्दर है और धार्मिक भी है।”
“पर ये social media पर कहीं भी नहीं मिल रही है,” यश ने मोबाइल हाथ में उठाते हुए कहा,
“भला आज के ज़माने में कौन social media पर profile नहीं रखता? मुझे तो doubt हो रहा है।”
माँ मुस्कराईं, उस मुस्कान में हल्की-सी तंज भी थी।
“तुम और तुम्हारा ये डब्बा!”
उन्होंने मोबाइल की ओर इशारा किया।
“हमारे ज़माने में कौन-सा ये सब होता था? फिर भी मैंने और तुम्हारे पापा ने शादी की थी ना।”
यह सुनकर यश और चिढ़ गया। उसे लगा माँ उसकी बात समझना ही नहीं चाहतीं।
उसने बहस को यहीं रोक देना बेहतर समझा, क्योंकि वह जानता था — माँ से कोई argument वो कभी जीत नहीं पाता।
वह चुपचाप मुड़ ही रहा था कि माँ फिर बोल पड़ीं —
“परसो मिलने जाना है उनके घर। तब तक मन बना लेना अपना।”
“पर मम्मी…” यश ने आधा वाक्य ही कहा था।
“पर-वर कुछ नहीं,” माँ ने दृढ़ स्वर में कहा। “बिना मिले reject मत करो।”
मुँह बनाते हुए यश वहाँ से उठ गया। उसके लिए उस समय कमरे में जाना ही सबसे safe option था।
अपने कमरे में पहुँचते ही उसने बिस्तर पर बैग फेंका और मोबाइल खोल लिया।
एक बार फिर वही काम — search, scroll, search.
Instagram.
Facebook.
LinkedIn.
कहीं न कहीं तो होगी।
लेकिन हर बार नतीजा वही — कुछ भी नहीं।
“आखिर ये कौन-सी generation की लड़की है?”
यश ने मन ही मन सोचा। आज के दौर में जहाँ identity, digital footprints से तय होती थी, वहाँ किसी का बिल्कुल invisible होना उसे असहज कर रहा था।
थोड़ी देर बाद उसे लगा कि वह समय बर्बाद कर रहा है। उसके लिए time सबसे कीमती currency थी। उसने मोबाइल एक तरफ रखा और लैपटॉप खोल लिया।
यश एक जैन युवा था। वह जैन धर्म को social media पर अलग-अलग तरीकों से फैलाया करता था।
Reels, short videos, motivational posts …उसकी online presence हर जगह थी।
अपने नाम के अनुरूप ही उसने यश प्राप्त कर लिया था। शायद ही कोई ऐसा जैन युवा था जो यश को नहीं जानता हो। उसके followers अब एक million के करीब पहुँच चुके थे। जहाँ भी वह जाता, लोग उसे पहचान लेते, उसके साथ selfie लेते और proudly post करते।
यश को अपनी influencing पर गर्व था। वह सच में मानता था कि वह जैन धर्म को विश्व स्तर पर पहुँचा रहा है। उसके लिए प्रभावना सबसे बड़ा कार्य था। उसे लगता था की अगर हजारों लोग उसकी एक reel देखकर धर्म की तरफ थोड़ा भी झुक जाएँ, तो इससे बड़ी साधना और क्या हो सकती है?
लेकिन इस प्रभावना की दौड़ में आराधना कहीं पीछे छूट रही थी| मंदिर जाना रोज़ संभव नहीं हो पाता था। हफ्ते में एक बार अभिषेक और पूजन कर लेने से वह खुद को संतुष्ट कर लेता था।
इतने socially active इंसान के लिए यह बात खटकने वाली थी कि उसकी होने वाली पत्नी किसी भी social media platform पर मौजूद न हो।
हालाँकि, biodata के हिसाब से अंतरा उसे हर मायने में अच्छी लगी थी। अंतरा की education, उसकी height, उसका जैन background से होना, दोनी की age में कम difference होना – सब कुछ यश के लिए positive था |
बस एक ही बात समझ से बाहर थी – इतनी साधारण लड़की उसकी असाधारण दुनिया में कहाँ और कैसे fit होगी?
क्या यश को ये लड़की पसंद आएगी ? कैसी होगी इनकी पहली मुलाकात जानने के लिए पढ़िए अगला पार्ट !

