मेरी अंतरात्मा

दिव्या: वाह! मेरे तो कितने सारे followers होगये quora पर और अब तो मेरा youtube channel भी है | मैं अब बहुत famous हूँ |

अंतरात्मा: दिव्या कितना मान करेगी ?

दिव्या: नहीं तो मैंने नहीं किया मान |

अंतरात्मा: तो फिर इतना उछल कौन रहा है ? कौन famous होने की लालसा कर रहा है ?

दिव्या: अरे वो तो मैं बस बता रही थी | अब क्या मैं खुश भी नहीं हो !

अंतरात्मा: सच में तो तू ज्ञान और ऐश्वर्या का मद कर रही है | याद नहीं क्या की ये सब अपने पूर्व पुण्य के उदय से होते हैं |

दिव्या: हाँ, मैं कैसे भूल गयी की सम्यग्दृष्टि आठ मदो से रहित होता है ! क्या मुझे सम्यक नहीं चाहिए ?

अंतरात्मा: समझदार होकर ऐसी बातें करती है | ये सब बाहर के झूठे यश वैभव आत्मा के अनुपम वैभव से compare नहीं किये जा सकते |

दिव्या: ये तो एक छण का छलावा है जो कर्म बंध का कारण है | इनमे सुख मान के फूलना भव बढ़ाना है | अपने परम आनंद को भूल के प्रसिध्दि में आनंद मान रही हूँ |

अंतरात्मा: यहाँ तू answers लिखने और video बनाने की कर्त्ता बुद्धि भी कर बैठी |

दिव्या: हाँ ! ये सब तो अपने उपादान से होते हैं | मैं तो केवल निमित्त मात्रा हूँ | मैंने लिखने का भाव किया पर लिखने वाली मैं नहीं हूँ |

अंतरात्मा: अब तू खुश हो सकती है | तूने समय रहते जिनवाणी माँ की बातें याद की और मान कषाय के कर्म बंध से बच गयी |

दिव्या: 🙂

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