नर भव की सार्थकता

**आत्म चिंतन का ये समय आया**

दिव्या: अरे मम्मी ! ये क्या old-fashioned गाने चलायें हैं |

मम्मी: ये गाना नहीं भजन है बेटा |

दिव्या: हाँ जो भी है | ये सब हटाओ मैं लगाती हूँ एक दम latest song |

मम्मी: अरे बेटा ये क्या कर रही हो ? इसे मत हटाओ सुनो कितना अच्छा भजन है|

दिव्या: इसमें क्या अच्छा है ?

मम्मी: आत्मा के चिंतन का ये ही समय है अगर हमने ये खो दिया तो ये जीवन व्यर्थ जायेगा |

दिव्या: क्यूँ जायेगा जीवन waste ? आप देखना मैं पढ़ाई करके बहुत बड़ी officer बनूंगी |

मम्मी: ये सब तो तुम इस भव के लिए कर रही हो | पर आगामी भवों में तुम्हारी ये लौकिक पढ़ाई काम नहीं आएगी | वहाँ तो तुम्हारे धर्म के संस्कार ही काम आएंगे |

दिव्या: अच्छा! ये धर्म के संस्कार क्या होते हैं ?

मम्मी: देखो हमें कितना सुन्दर जिनेन्द्र भगवान का मार्ग मिला है जिस पर चल कर हम संसार के दुःखो से छूट सकते हैं | हमें इसकी महिमा करनी चाहिए और अपना समय स्वाध्याय, चिंतन-मनन में लगाना चाहिए |

दिव्या: ये सब धर्म के काम तो बड़ो के होते हैं | अभी मुझे पढ़ाई से फुर्सत नहीं मिलती | पहले मैं बड़ी officer बन जाऊ फिर आराम से ये सब स्वाध्याय आदि करूंगी |

मम्मी: बेटा क्या तुम्हें पता है की तुम्हारी उम्र कितनी होगी | इस जीवन का कोई ठिकाना नहीं है | ऐसे ही सोचते हुए हमने नर भव के कितने ही वर्ष गवा दिए पर हाथ कुछ नहीं आया | यदि अब भी अपने भावों की संभाल नहीं करेंगे तो फिर से अनंत संसार में रुलेंगे |

दिव्या: ये बात तो सही कही अापने मम्मी | मुझे नहीं पता मेरी age कितनी है | पर मुझे करना क्या होगा जिससे मेरा ये मनुष्य जीवन सफल हो |

मम्मी: जहाँ तक बने अपना समय धार्मिक कार्यो जैसे की पूजा, स्वाध्याय आदि में लगाओ | और बाकि समय जो स्वाध्याय किया उसके चिंतन-मनन में लगाओ |विचार करो मैं कौन हूँ ? मेरा स्वरुप क्या हैं ? क्या मैंने ऐसा कुछ किया आज जिससे मैं ये कह सकूं की मैंने अपना नर जन्म सफल किया |

दिव्या: ठीक है मम्मी | मैं आज से ही जिनवाणी का स्वाध्याय करूंगी और अपना जीवन सफल बनाऊंगी |

मम्मी: यह नर भव फिर मिलन कठिन है ,जो सम्यक नहीं होवे ||

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